आज ज़रुरत है जागने की, भ्रष्टाचार को मिटाने की....

..ज़रुरत है जागने की, भ्रष्टाचार को मिटाने की ..... सरकारी हॉस्पिटल मे मरीजो के लिए जो खाना आता है वो सारा मरीजो को नहीं मिलता, मिलता है तो वो वहां वार्ड मे खाना लाने वाले कर्मचारियों को. मरीजो को केवल आधा ही मिलता है और बाकि स्टाफ के लोग खुद ही खा लेते है. यही नहीं खाना बचाकर वह अपने घर बांध कर ले जाते है. मरीजो के लिए को जो दूध दिया जाता है, वो भी बचाकर अपने घर ले जाते है. और कैंटीन मे काम करने वालो का तो क्या कहना अपने घर का आधा राशन तो वो लोग कैंटीन से ही ले जाते है. कोई देखने वाला नहीं है, मरीजो और उनके मिलने आने वालो को रोकने के लिए तो गार्ड लगा रखें है, परन्तु इस चोरी को रोकने के लिए कोई भी नहीं....

आज ज़रुरत है जागने की, भ्रष्टाचार को मिटाने की....

4 comments:

कविता रावत said...

आज ज़रुरत है जागने की, भ्रष्टाचार को मिटाने की....
sach sabke liye yah ek bahut badi jarurat hai yahi sabko samjhna hai.
bahut badiya prastuti..
Saarthak prastuti hetu aabhar!

DR. ANWER JAMAL said...

ब्लॉगर्स मीट वीकली (6) Eid Mubarak में आपका स्वागत है।
इस मुददे पर कुछ पोस्ट्स मीट में भी हैं और हिंदी ब्लॉगिंग गाइड की 31 पोस्ट्स भी हिंदी ब्लॉग जगत को समर्पित की जा रही हैं।

राकेश कौशिक said...

"आज ज़रुरत है जागने की"
सही और प्ररेक प्रस्तुति

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

sahee baat hai!